भारतीय अर्थव्यवस्था में बेरोज़गारी की स्थिति


भारत में बेरोज़गारी एक दीर्घकालिक और संरचनात्मक समस्या रही है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें गिरावट के सकारात्मक रुझान देखने को मिले हैं।

​यहाँ भारत में बेरोज़गारी से जुड़ी मुख्य जानकारी और नवीनतम आँकड़े दिए गए हैं:

​📊 नवीनतम बेरोज़गारी दर (Unemployment Rate)

​सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोज़गारी दर में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है:

  • दीर्घकालिक रुझान (सालाना):
    • ​वर्ष 2017-18 में 6.0% थी।
    • ​वर्ष 2023-24 में घटकर 3.2% हो गई है। (यह आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के वार्षिक आँकड़ों के अनुसार है, जो ‘सामान्य स्थिति’ पर आधारित है।)
  • मासिक आँकड़े (सितंबर 2025):
    • ​सितंबर 2025 में यह मामूली रूप से बढ़कर 5.2% दर्ज की गई। (यह ‘करंट वीकली स्टेटस’ पर आधारित मासिक अनुमान है)।
  • युवा बेरोज़गारी दर (15-29 वर्ष): 2023-24 में यह लगभग 10.2% थी।

​🔍 बेरोज़गारी के प्रकार

​भारत में मुख्य रूप से संरचनात्मक बेरोज़गारी पाई जाती है, जिसके कुछ प्रमुख प्रकार इस प्रकार हैं:

  1. संरचनात्मक बेरोज़गारी (Structural Unemployment):
    • ​यह तब होती है जब श्रमिकों के कौशल और बाज़ार में उपलब्ध नौकरियों की ज़रूरतों के बीच तालमेल की कमी होती है।
    • ​यह भारत की अर्थव्यवस्था के पिछड़े ढाँचे और शिक्षा प्रणाली में उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार कौशल की कमी से जुड़ी है।
  2. प्रच्छन्न बेरोज़गारी (Disguised Unemployment):
    • ​यह मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में पाई जाती है, जहाँ जितने श्रमिकों की आवश्यकता होती है, उससे अधिक श्रमिक काम में लगे होते हैं।
    • ​अतिरिक्त श्रमिकों को हटाने से उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता।
  3. मौसमी बेरोज़गारी (Seasonal Unemployment):
    • ​यह तब होती है जब लोगों को वर्ष के कुछ खास महीनों (जैसे कृषि में बुवाई या कटाई के मौसम में) ही काम मिलता है।
  4. शिक्षित बेरोज़गारी (Educated Unemployment):
    • ​स्नातक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त व्यक्ति को भी उसकी योग्यता के अनुरूप काम नहीं मिल पाता है।

​💡 बेरोज़गारी के मुख्य कारण

​भारत में बेरोज़गारी के कई कारण हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • तेजी से बढ़ती जनसंख्या: नौकरियों की माँग, उनकी आपूर्ति से कहीं अधिक है।
  • औद्योगिक विकास की धीमी गति: विनिर्माण (Manufacturing) और बड़े उद्योगों का पर्याप्त विस्तार नहीं हो पाना।
  • कौशल में कमी (Skill Mismatch): शिक्षा और प्रशिक्षण का स्तर उद्योग की वास्तविक ज़रूरतों से मेल नहीं खाता।
  • कृषि पर अत्यधिक निर्भरता: बड़ी आबादी अभी भी कृषि क्षेत्र पर निर्भर है, जहाँ प्रच्छन्न और मौसमी बेरोज़गारी अधिक है।
  • अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा और निवेश: कुछ क्षेत्रों में निवेश और आधारभूत संरचना की कमी से रोज़गार के अवसर सीमित होते हैं।

​🛣️ आगे का रास्ता

​बेरोज़गारी को कम करने के लिए सरकार कई प्रयास कर रही है, जिनमें कौशल विकास (Skill Development) पर ज़ोर, विनिर्माण को बढ़ावा (जैसे ‘मेक इन इंडिया’), और उद्यमशीलता को समर्थन देना शामिल है।


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