बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कोलकाता में आयोजित एक विशाल गीता पाठ कार्यक्रम में यह महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने देश के लोगों को ‘सनातन’ धर्म को अपनाने और ‘तनातनी’ (तनाव/विवाद) से दूर रहने का संदेश दिया।
उनके संबोधन के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
- मूल संदेश: उन्होंने कहा कि भारत को आज ‘सनातनी’ (सनातन धर्म का पालन करने वाला) लोगों की ज़रूरत है, जो देश को जोड़ने और सद्भाव फैलाने का काम करें, न कि ‘तनातनी’ (विवाद, झगड़े, तनाव) पैदा करने वालों की।
- सनातन धर्म की आवश्यकता: धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन धर्म के मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि यह धर्म हमें प्रेम, एकता और शांति का पाठ सिखाता है। उन्होंने लोगों से इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
- गीता पाठ का महत्व: उन्होंने इस बात पर बल दिया कि गीता पाठ का आयोजन यही दर्शाता है कि देश को अध्यात्म और धर्म के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है, जिससे सामाजिक सद्भाव बना रहे।
- राष्ट्रवाद और धर्म: उन्होंने अपने संदेश में राष्ट्रवाद और धार्मिक चेतना को जोड़ने का प्रयास किया, जहाँ एक सनातनी व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में देश की सेवा कर सकता है।
यह कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया गया था और इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। धीरेंद्र शास्त्री अक्सर अपने बयानों के माध्यम से सनातन धर्म और राष्ट्रवाद के मुद्दे उठाते रहते हैं।